Science Behind Depression || डिप्रेशन क्यों होता है || In Hindi - Explained By Ainesh Kumar

Depression - symptoms, causes & treatment in Hindi ||डिप्रेशन(Depression) के लक्षण, कारण, इलाज || Explained By Ainesh Kumar









दोस्तों आप लोगों ने तो ये खबर सुन ही लिया होगा की एक्टर सुशांत सिंह राजपूत ने ख़ुदकुशी कर ली है,और इसका कारण डिप्रेशन बताया जा रहा है । आप ने तो उनकी फिल्म देखी ही होगी कितना अच्छा अभनय करते थे,लेकिन अब नहीं रहे वो पर उनकी यादे हमेशा हमारे साथ रहेंगे। 

दोस्तों  डिप्रेशन सिर्फ देखने में छोटा सा शब्द है लेकिन यह आगे चलकर कितना घातक बन जाए किसी को पता नहीं होता है। यह ऐसी बीमारी जिसके शुरुआती लक्षणों से आपको बिल्कुल पता नहीं चलने वाला कि आप डिप्रेशन का शिकार है लेकिन धीरे-धीरे आपके हाव-भाव बदलने लगते हैं, आपको लग सकता है ये नॉर्मल है लेकिन एक समय के बाद कुछ नॉर्मल नहीं रहता बल्कि आपके शरीर और दिमाग में तालमेल बिगड़ने लगती है।

तो दोस्तों आज हम इसी टॉपिक पर बात विमर्श करेंगे और जानेंगे की क्या क्या लक्षण होते है डिप्रेशन के और इसके क्या कारण है और इसका निवारण क्या है, इत्यादि। 

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दोस्तों जैसा की हम सब वाकिफ़ है की जब कोई जिन्दगी से हार जाता है या तंग हो जाता है तब वो ख़ुदकुशी करने के बारे में सोचता है, आप सब तो जानते ही होंगे और न्यूज़ पेपर तो पढ़ते ही होंगे जिसमे पता चलता है की कुछ इंजीनियर छात्रों ने खुदखुशी कर ली है,क्योकि वो Exam में Fail  हो गया है। आये दिन हमारे आस-पास ऐसी दुखद घटनाएं होती रहती हैं. ऐसी कई सारी घटनाओं की जड़ Depression या  अवसाद होती  है। 



Depression अब इतनी Common Illness हो चुकी है कि इसे “Common Cold Of Mental Illness” भी कहते हैं। 

भारत जैसे विकासशील देशों में डिप्रेशन बेहद सामान्य समस्या है। भारतीय युवाओं में तेजी से डिप्रेशन के मामले देखने में आ रहे हैं। एक रिसर्च के अनुसार, 13 से 15 साल की उम्र के मध्य का हर 4 में से 1 किशोर डिप्रेशन का शिकार हो रहा है।

किशोरावस्था में डिप्रेशन के शिकार व्यक्ति को ऐसा महसूस होता है जैसे, पूरी भीड़ उन्हीं को देखकर हंस रही है। भारत में किशोरावस्था में डिप्रेशन के मामलों में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गई है।  इसकी तमाम वजहें हो सकती हैं। जैसे, 

  • माता-पिता की उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव
  • शिक्षा और रोजगार का दबाव 
  • पारिवारिक समस्याएं
  • रिलेशनशिप की समस्याएं
  • अपने लुक्स से संतुष्ट न होना
  • अकेलापन,इत्यादि। 


वहीं सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Centers For Disease Control And Prevention) यानी सीडीसी (CDC) का अनुमान है कि 8.1 फीसदी अमेरिकी युवा, जिनकी उम्र 20 साल या आसपास है, वह साल 2013 से 2016 के बीच में औसतन दो हफ्ते तक डिप्रेशन की चपेट में रहे हैं। 



अवसाद क्या है ( What Is Depression ) ???

अवसाद या डिप्रेशन को Mood  Disorder के तौर पर Classified  किया गया है। इसे इंसान की उदासी, नुकसान या ऐसे गुस्से के रूप में समझा जा सकता है, जिससे किसी इंसान की रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ता है। जीवन में कभी-कभार Low Feel करना एक सामान्य बात है. लेकिन जब ये एहसास बहुत समय तक बना रहे और आपका साथ ना छोड़े तो ये Depression या अवसाद हो सकता है. ऐसे में जीवन  बड़ा नीरस और खाली-खाली सा लगने लगता है।  ऐसे में ना दोस्त अच्छे लगते हैं और ना ही किसी और काम में मन लगता है। Life Hopeless लगने लगती है और Positive बातें भी Negative लगने लगती हैं। यदि आपके साथ भी ऐसा होता है तो घबराने की ज़रुरत नहीं है,ज़रुरत है Depression के Symptoms और कारणों को समझने की और फिर उसका इलाज करने की। 

डिप्रेशन के शिकार इंसान के लिए सुख, शांति, सफलता, खुशी यहां तक कि संबंध भी बेमानी होने लगते हैं। वह इंसान संबंधों में बेईमानी का उत्तर अपने उग्र स्वभाव, गाली गलौज व अत्यधिक शंकालु स्वभाव से देने की कोशिश करता है। डिप्रेशन के दौरान उसे सभी जगह निराशा, तनाव, अशांति और अरुचि की मौजूदगी समझ आने लगती है।

हालांकि लोगों को डिप्रेशन का अनुभव कई अलग तरीकों से हो सकता है। ये आपके रोजमर्रा के कामों को प्रभावित कर सकता है। इसकी वजह से काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। ये आपके रिश्तों और कुछ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं पर भी असर डाल सकता है। 

हम सभी के जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। कभी सफलता मिलने पर बहुत ख़ुशी मिलती है तो कभी असफल होने पे इंसान दुखी हो जाता है। कई बार लोग छोटे-मोटे दुःख को भी Depression का नाम दे देते हैं, जो कि बिलकुल गलत है।  Depression Normal Sadness से बहुत अलग होता है। 

आइये इसकी परिभाषा को समझते हैं:-


“डिप्रेशन  एक ऐसी मानसिक स्थिति  या स्थायी मानसिक विकार है जिसमे व्यक्ति को  उदासी, अकेलापन, निराशा, कम आत्मसम्मान, और आत्मप्रतारणा महसूस  होती  है ; इसके संकेत मानस – मिति संबंधी मंदता ,समाज से कटना ,और ऐसी स्थितिया जिसमे  की कम भूख लगना और अत्यधिक नीद आना में नज़र आते हैं.”


डिप्रेशन के कारण जिन बीमारियों का बुरा असर हो सकता है। उनमें शामिल हैं : -

  • आर्थराइटिस (Arthritis)
  • अस्थमा (Asthma)
  • कार्डियोवेस्क्युलर बीमारियां (Cardiovascular Disease)
  • कैंसर (Cancer)
  • डायबिटीज (Diabetes)
  • मोटापा (Obesity ),आदि। 


अवसाद के लक्षण ( Depression Symptoms )

ये जानना भी बहुत महत्वपूर्ण है कि हर किसी की जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते हैं। हर कोई कभी न कभी दुखी और उदास महसूस कर सकता है। लेकिन, अगर आप लगातार दुख और निराशा का अनुभव कर रहे हैं तो, ये डिप्रेशन हो सकता है। 

डिप्रेशन को गंभीर मेडिकल समस्या माना जाता है। सही इलाज न किया जाए तो यह खतरनाक भी हो सकता है। इसके अलावा डिप्रेशन का सही ट्रीटमेंट लेने पर कुछ ही हफ्तों में इससे राहत मिलते हुए भी देखी गई है।

यदि आपको नीचे दिए गए Symptoms में से एक या अधिक आपके साथ Match करते  दिखते  हैं  तो आपके Depressed होने की सम्भावना है:-

1. या तो आपको नीद नहीं आती या बहुत अधिक नीद आती है। 
2. आप ध्यान नहीं केन्द्रित कर पाते और जो काम आप पहले आसानी से कर लेते थे उन्हें करने में कठिनाई होती है। 
3. आप Hopeless और Helpless Feel करते हैं। 
4. आप चाहे जितनी कोशिश करें पर अपनी Negative Thoughts  को  नहीं रोक पाते हैं। 
5. या तो आपको भूख नहीं लगती या आप बहुत ज्यादा खाते हैं। 
6. आप पहले से कहीं जल्दी Irritate या Aggressive हो जाते हैं, और गुस्सा करने लगते हैं। 

7 . आपको लगता है कि ज़िन्दगी जीने लायक नहीं है और आपके मन में Suicidal Thoughts आते हैं। 


Depression and Suicide


बहुत ज्यादा Depression की वज़ह से व्यक्ति आत्महत्या करने तक की सोच सकता है. Depression के दौरान व्यक्ति खुद को बिलकुल असहाय महसूस कर सकता है और उसे सभी समस्याओं  का हल अपनी life end करने में नज़र आने लगता है.यदि कोई आपसे आत्महत्या करने जैसी बातें करता है तो संभवतः वो Depression से ग्रसित है , और वो सिर्फ आपको अपनी बात ही नहीं बता रहा है बल्कि वो मदद के लिए चिल्ला रहा है, और आपको उसकी मदद ज़रूर करनी चाहिए. और यदि आप खुद को ऐसा करते देख रहे हैं तो बिना देरी किये आपको Experts की मदद लेनी चाहिए.

यदि आप किसी में इन बातों को देखते हैं तो वो आत्महत्या के लिए चेतावनी हो सकती है:-

1. अपने को मारने या ख़तम करने के बारे में बात करना.
2. अचानक ही लोगों को Goodbye करने के लिए मिलना या Phone करना.
3. बिना वजह अपनी संपत्ति या अन्य Valuable चीजों को औरों को देना.
4. ऐसी भावनाएं व्यक्त करना जिससे व्यक्ति बहुत ही असहाय और उलझा हुआ प्रतीत हो.
5. हमेशा मरने सम्बन्धी बातें करना.
6. असामान्य व्यवहार  करना जैसे कि बिना वजह Red-Light Jump  करना.
7. असामान्य बातें करना जैसे, ” मेरे ना रहने से किसी को फरक नहीं पड़ता.”
यदि आपको लगता है कि आपका कोई Friend या Relative Suicide करने के बारे में सोच रहा है तो तुरंत ही उसे Professional Help दिलाइये. Suicidal Thoughts और Feelings के बारे में Openly बात करना किसी की जान बचा सकता है। 


पुरुषों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में Depression अलग-अलग तरह से होता है. इसके बारे में Awareness रखना, समस्या को सही तरीके से समझने और उसका निवारण करने में मदद करता है:-

मूड संबंधी (Mood Related ) :-


  • गुस्सा (Anger)
  • आक्रामकता (Aggressiveness)
  • चिड़चिड़ापन (Irritability)
  • चिंता (Anxiousness)
  • बेचैनी (Restlessness)

भावना संंबंधी (Emotional Related ) :-

  • बर्बाद होने की भावना (Feeling Empty)
  • उदास/दुख (Sad)
  • निराशा (Hopeless) 

व्यवहार संबंधी (Behavioral Related ) :-

  • किसी काम में मन न लगना (Loss Of Interest) 
  • पसंदीदा काम से खुशी न मिलना (No Longer Finding Pleasure In Favorite Activities)
  • आसानी से थकान होना (Feeling Tired Easily)
  • आत्महत्या के विचार आना (Thoughts Of Suicide)
  • बहुत ज्यादा शराब पीना (Drinking Excessively)
  • ड्रग्स का इस्तेमाल करना (Using Drugs)
  • खतरनाक कामों की कोशिश करना (Engaging In High-Risk Activities)

सेक्स संबंधी (Sexual Related ) :-

  • यौनेच्छा में कमी आना (Reduced Sexual Desire)
  • शीघ्रपतन की समस्या होना (Lack Of Sexual Performance)

संज्ञा संबंधी (Cognitive Related ) :-

  • ध्यान केंद्रित करने में असमर्थ होना (Inability To Concentrate)
  • काम पूरे करने में मुश्किल होना (Difficulty Completing Tasks)
  • बातचीत के दौरान देर से जवाब दे पाना (Delayed Responses During Conversations)

नींद संबंधी (Sleep Related ) :-

  • अनिद्रा/इंसोम्निया (Insomnia)
  • नींद कम आना (Restless Sleep)
  • बहुत ज्यादा नींद आना (Excessive Sleepiness)
  • पूरी रात न सो पाना (Not Sleeping Through The Night)

शरीर संबंधी (Physical Related ) :-

  • थकान (Fatigue)
  • दर्द (Pains)
  • सिरदर्द (Headache)
  • पाचन में समस्या (Digestive Problems)


पुरूषों में अवसाद :-

Depressed पुरुषों में ऐसी ही महिलाओं की अपेक्षा कम निराशा और Self-Hatred  देखी जाती है. इसकी जगह वो थके होने, चिडचिड़ा होने, नीद ना आने ,काम में मन ना लगने जैसी शिकायतें  करते  हैं.  अवसाद के कुछ और लक्षण जैसे कि गुस्सा आना, आक्रामक होना, हिंसा करना , लापरवाह होना और अधिक शराब पीना भी ऐसे पुरुषों में देखे जा सकते हैं. हालांकि महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा Depressed होने के Chances Double होते हैं पर पुरुषों में आत्महत्या की प्रवित्ति ज्यादा होती है.


महिलाओं में अवसाद :-


महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा Depressed होने के Chances Double होते हैं, इसकी कुछ वजहें Hormones से Related होती हैं, खासतौर से  Premenstrual Syndrome  (महावारी पूर्व सिंड्रोम PMS), Premenstrual Dysphoric Disorder ( PMDD ), Postpartum Depression, And Perimenopausal Depression. महिलाओं में Depression के लक्षण ज्यादा खाने, ज्यादा सोने, Weight बढ़ने , अपराध-बोध होने , निराश होने के रूप में नज़र आते हैं.



किशोरावस्था में अवसाद :-


कुछ Depressed Teens दीखते हैं पर कुछ नहीं. दर-असल Teenagers में अत्यधिक चिडचिड़ापन अवसाद का सबसे बड़ा लक्षण होता है. एक Depressed Teenager आसानी से क्रोधित हो सकता है, दूसरों से बुरा व्यवहार कर सकता है और उसे बिना कारण बदन में दर्द की शिकायत कर सकता है. बच्चों पर माता-पिता द्वारा पढाई के लिए डाला गया अत्यधिक दबाव और दूसरों से Comparison भी Depression का स्रोत हो सकता है.यदि ऐसे Teens का उपचार ना किया जाये तो उन्हें घर और स्कूल में दिक्कत आ सकती है, ऐसे बच्चे आसानी से Drugs लेना शुरू कर सकते हैं, और उनमे आत्महत्या की प्रवित्ति भी आ सकती है. लेकिन मदद मिलने पर इसका इलाज तेजी से हो सकता है.

बुजुर्गों में अवसाद :-

Old Age के साथ साथ आने वाली परेशानियां जैसे कि – वियोग, Health Problems, दूसरों पे  निर्भरता, Income कम होना, इत्यादि व्यक्ति को अवसाद्ग्रसित कर सकता है. लेकिन बुढापे के साथ Depression होना  कोई  आम बात नहीं है. ऐसे बुजुर्ग Emotional से ज्यादा Physical Problems की अधिक Complaint करते  हैं . इसी लिए अधिकतर उनकी Depression सम्बंधित समस्याओं पर किसी का ध्यान नहीं जाता है. आये दिन तबियत खराब होने की शिकायत करना Depression का सूचक हो सकती हैं.

अवसाद के कारण (Cause of Depression )

कुछ बीमारीओं के सटीक कारण होते हैं, जिससे उनका इलाज़ आसान हो जाता है. Diabetes (मधुमेह) है तो Insulin ले लीजिये, Appendicitis (पथरी) है तो Surgery करा लीजिये. लेकिन Depression थोड़ी जटिल बीमारी है. ये सिर्फ मस्तिष्क में हो रहे Chemical Imbalance की वजह से ही नहीं बल्कि कोई अन्य जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारणों से भी हो सकता है. दुसरे शब्दों में कहें तो ये आपकी Lifestyle, आपकी Relations, आप  समस्याओं को कैसे Handle करते  हैं, इन बातों की वजह से भी हो सकता है. पर कुछ Factors Depression होने के Chances बढ़ा देते हैं:-


1. अकेलापन
2. Social Support की कमी
3. वित्तीय समस्याएं
4. हाल में हुए तनावपूर्ण अनुभव
5. वैवाहिक या अन्य  रिश्तों में खटास
6. खराब बचपन
7. शराब या अन्य नशीली दवाओं का सेवन
8. बेरोजगारी
9. Work Pressure


डिप्रेशन के सामान्य कारणों में शामिल हैं :-



1. पारिवारिक इतिहास (Family History)

आप में डिप्रेशन के विकसित होने का खतरा कहीं ज्यादा होता है अगर, आपके परिवार में किसी को डिप्रेशन की समस्या रही हो। डिप्रेशन के अलावा मूड से जुड़ा कोई अन्य डिसऑर्डर होने पर भी आपको डिप्रेशन की समस्या हो सकती है।



2. बचपन में सदमा लगने पर (Early Childhood Trauma) 

बचपन में घटने वाली कुछ घटनाओं का कई बार बच्चों के कोमल मन पर गहरा असर पड़ता है। कुछ घटनाओं की प्रतिक्रिया में शरीर में डर की भावना बैठ जाती है और मन थाेड़े से तनाव को झेल पाने में भी नाकाम होने लगता है।

3. दिमागी संरचना (Brain Structure)
अगर आपके दिमाग के सामने का हिस्सा कम सक्रिय है तो, आपको डिप्रेशन होने के चांस कई गुना बढ़ जाते हैं। हालांकि वैज्ञानिक अभी तक ये पता नहीं लगा सके हैं कि दिमाग में ये परिवर्तन डिप्रेशन होने के बाद होते हैं या पहले हो जाते हैं। 

4. मेडिकल कंडीशन (Medical Conditions)
कुछ खास बीमारियों के कारण आपको भी डिप्रेशन की समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है। इन बीमारियों में 
  • असाध्य बीमारियां (Chronic Illness)
  • अनिद्रा/इंसोम्निया (Insomnia)
  • असहनीय दर्द (Chronic Pain)
  • ध्यान अभाव सक्रियता विकार (Attention-Deficit Hyperactivity Disorder Or ADHD),आदि शामिल हैं।

5. ड्रग्स का सेवन (Drug Use)
अगर किसी को ड्रग्स या अल्कोहल के सेवन की लत रही है तो उसे भी डिप्रेशन होने के चांस बढ़ जाते हैं।


डिप्रेशन के अन्य कारण ( Other Causes Of Depression ):-

बहुत से लोगों को कभी ये पता नहीं चल पाता है कि उन्हें होने वाले डिप्रेशन की वजह आखिर क्या है? ऐसे लोगों की संख्या करीब 30 फीसदी के आसपास है जिन्हें आंशिक रूप से डिप्रेशन की समस्या है।

इन कारणों के अलावा भी डिप्रेशन के अन्य खतरे हो सकते हैं। इनमें शामिल है : 


  1. आत्मसम्मान में कमी या खुद की आलोचना करना (Low Self-Esteem Or Being Self-Critical)

  2. मेंटल बीमारी का इतिहास होना (Personal History Of Mental Illness)

  3. कुछ खास दवाओं के सेवन के कारण (Certain Medications)

  4. तनावपूर्ण घटनाओं के कारण (Stressful Events)

  5. किसी करीबी को खो देने के कारण (Loss Of A Loved One)

  6. आर्थिक समस्याओं के कारण (Economic Problems)

  7. तलाक की वजह से (Divorce),इत्यादि।

क्या करे When Feel डिप्रेशन :-

Depression का सही कारण समझना उसके इलाज को आसान बना सकता है. जैसे कि यदि कोई अपनी नौकरी से परेशान होने की वजह से Depression में जा रहा है तो उसके लिए किसी Antidepressant लेने की जगह कोई अन्य अच्छी नौकरी या रोजगार कहीं ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. यदि आप अकेलेपन की वजह से परेशान हैं तो  दोस्तों के साथ वक़्त बिताना या कोई अच्छी Hobby Pursue करना आपके लिए ज्यादा लाभदायक हो सकता है. ऐसे Cases में परिस्थितियां बद्लालने मात्र से अवसाद से छुटकारा पाया जा सकता है।


डिप्रेशन के प्रकार (Types Of Depression)

डिप्रेशन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है : 


1. प्रमुख अवसादग्रस्तता विकार (Major Depressive Disorder) 
2. सतत अवसादग्रस्तता विकार (Persistent Depressive Disorder)

1. प्रमुख अवसादग्रस्तता विकार (Major Depressive Disorder)
डिप्रेशन का सबसे गंभीर प्रकार है। डिप्रेशन की इस किस्म में लगातार 

  • उदासी
  • निराशा 
  • नाकाबिल 
होने की भावनाएं मन में घर कर जाती हैं। ये भावनाएं कभी भी अपने आप से दूर नहीं होती हैं। 

प्रमुख अवसादग्रस्तता विकार के भी कई अन्य टाइप हो सकते हैं। अमेरिकन साइकैट्रिक एसोसिएशन इसे विनिर्देशक या 'स्पेसिफायर' कहती है। इनमें शामिल हैं : 

  • असामान्य फीचर्स (Atypical Features)
  • चिंता की समस्या (Anxious Distress)
  • मिश्रित फीचर्स (Mixed Features)
  • मौसमी पैटर्न (Seasonal Patterns)
  • उदासी के फीचर्स (Melancholic Features)
  • मनोवैज्ञानिक फीचर्स (Psychotic Features)
  • विचित्र मानसिक व्यवहार (Catatonia)

2. सतत अवसादग्रस्तता विकार (Persistent Depressive Disorder=PDD )

PDD को अक्सर डिस्थीमिया (Dysthymia) भी कहा जाता है। ये हल्का, लेकिन गंभीर किस्म का डिप्रेशन है।  

डॉक्टर इस किस्म के डिप्रेशन की पहचान के लिए कम से कम मरीज के दो साल के अनुभवों का अध्ययन करते हैं। पीडीडी आपके जीवन को मेजर डिप्रेशन से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है क्योंकि ये ज्यादा लंबे समय तक मरीज को परेशान करता रहता है।


PDD  से प्रभावित मरीजों के सामान्य लक्षणों में शामिल है :

  • रोजमर्रा के कामों में रुचि खत्म होना (Lose Interest In Normal Daily Activities)
  • नाउम्मीद हो जाना (Feel Hopeless)
  • काम करने की क्षमता घट जाना (Lack Productivity)
  • आत्मसम्मान में कमी आना (Have Low Self-Esteem)
डिप्रेशन का सफलतापूर्वक उपचार करना संभव है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आप अपने ट्रीटमेंट प्लान को अच्छे ढंग से फॉलो करें। 


डिप्रेशन का उपचार (Treatment For Depression)

आप आसानी से किसी एक ट्रीटमेंट की मदद से लक्षण के आधार पर सफलतापूर्वक इलाज कर सकते हैं। या आप दो या दो से ज्यादा ट्रीटमेंट भी एक साथ ले सकते हैं। डिप्रेशन के इलाज में दो या उससे ज्यादा लाइफस्टाइल थेरेपी को शामिल करना सामान्य बात है। 

जिस प्रकार अलग अलग लोगों में Depression के लक्षण और कारण अलग अलग होते हैं, उसी प्रकार  इससे पार पाने के तरीके भी अलग अलग होते हैं। जो उपाय एक व्यक्ति के लिए काम कर जाये वो दुसरे के लिए भी करे ऐसा ज़रूरी नहीं है, और ज्यादातर Cases में इलाज कि कोई एक विधि पर्याप्त नहीं होती। यदि आपको खुद में या आपके किसी शुभचिंतक में अवसाद के लक्षण नज़र आते हैं तो Treatment Options को Explore करने में कुछ वक़्त लगाइए। अधिकतर मामलों में सबसे बढिए Approach इन उपायों का Combination होती हैं :  Social Support, Lifestyle Changes, Emotional Skills Building, And Professional Help.

लेकिन कोई भी इलाज डॉक्टर की सलाह लिए बिना नहीं लेना चाहिए। इन उपचारों में शामिल हैं : 

1. दवाएं (Medications)


डिप्रेशन के इलाज के लिए ज्यादातर डॉक्टर एंटी डिप्रेसेंट्स (Antidepressants), एंटीएंग्जाइटी (Antianxiety), या एंटीसाइकोटिक (Antipsychotic) दवाओं के सेवन की सलाह देते हैं।

2. साइकोथेरेपी (Psychotherapy)


साइकोपैथ से बात करके आप निगेटिव भावनाओं को खुद से दूर रखने की स्किल्स को सीख सकते हैं। आप परिवार और ग्रुप थेरेपी सेशन में शामिल होकर भी खुद को लाभ पहुंचा सकते हैं।  

3. लाइट थेरेपी (Light Therapy)


सफेद रंग की रोशनी में खुद को रखने भर से आप न सिर्फ अपने मूड को अच्छा कर सकते हैं बल्कि डिप्रेशन के लक्षणों से भी राहत पा सकते हैं। ये थेरेपी आमतौर पर सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर के इलाज में इस्तेमाल की जाती है।

 इसे अब मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर विद सीजनल पैटर्न (Major Depressive Disorder With Seasonal Pattern) कहा जाता है। 



वैकल्पिक थेरेपी (Alternative Therapies)
अपने डॉक्टर से एक्युपंक्चर या दवाओं के बारे में बात कर सकते हैं। कुछ हर्बल सप्लीमेंट्स जैसे फिश ऑयल भी डिप्रेशन के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। मेरी सलाह यही है कि कोई भी सप्लीमेंट लेने या खाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।

एक्सरसाइज (Exercise)

हफ्ते में 3 से 5 दिन 30 मिनट तक कसरत करने का लक्ष्य रखें। एक्सरसाइज से शरीर में एंडोरफिन्स (Endorphins) का उत्पादन बढ़ जाता है, ये वो हार्मोन हैं जो आपके मूड को ठीक रखने में मदद करते हैं।

अल्कोहल और ड्रग्स के सेवन से बचें (Avoid Alcohol And Drugs)

शराब पीना या ड्रग्स लेने से आप थोड़ी देर के लिए बेहतर महसूस कर सकते हैं। लेकिन लंबे वक्त में शरीर पर इनका निगेटिव प्रभाव ही पड़ता है। ये चीजें मिलकर आपके डिप्रेशन और एंग्जाइटी के लक्षणों को और खराब कर सकती हैं। 

न कहना भी सीखें (Learn How To Say No)

अगर आप खुद को बेचैन महसूस करेंगे तो, ये एंग्जाइटी और डिप्रेशन के लक्षणों को और ज्यादा खराब कर सकता है। अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ के बीच सीमाएं तय कीजिए। इससे आप कुछ ही दिन में बेहतर महसूस करना शुरू कर देंगे।

अपना ख्याल रखें (Take Care Of Yourself)

आप खुद का ख्याल रखकर भी डिप्रेशन के लक्षणों से राहत पा सकते हैं। इसमें 

  1. ढेर सारी नींद
  2. हेल्दी डाइट लेना
  3. निगेटिव लोगों से दूर रहना
  4. आनंद देने वाले कामों में हिस्सा लेना शामिल है।

कई बार डिप्रेशन दवाओं से ठीक नहीं होता है। अगर आपके लक्षणों में सुधार नहीं दिखता है तो आपका डॉक्टर आपको दूसरे ट्रीटमेंट को अपनाने की सलाह दे सकता है। इनमें शामिल हैं

1. इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी (Electroconvulsive Therapy)

2. ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक सिम्यूलेशन (Transcranial Magnetic Stimulation),आदि।

ये दोनों थेरेपी डिप्रेशन के इलाज में बेहद कारगर हैं और आपके मूड को ठीक करने में मदद कर सकती हैं। 

अपनी  Lifestyle Change  कीजिये :-


ऐसा आप इन तरीकों से कर सकते हैं:

1. रिश्तों में सुधार ला कर
2. रोज व्यायाम करके
3. सेहत से भरपूर भोजन करके
4. Relaxation techniques प्रयोग करके
5. नकारात्मक सोच बदल कर
6. Emotional Skills develop करिए :
7. बहुत लोग तनाव को सही से deal नहीं  कर पाते हैं और भावुक हो जाते हैं. Emotional skills आपको विपरीत परिस्थितियों में अपना balance बनाये रखने में मदद करती हैं.इसके लिए आप stress management से सम्बंधित कोई short-term course कर सकते हैं। 

निष्कर्ष (Outlook For Depression)


डिप्रेशन अस्थायी भी हो सकता है और ये लंबे समय तक चलने वाली चुनौती भी हो सकती है। हमेशा ट्रीटमेंट से ही डिप्रेशन पूरी तरह ठीक नहीं हो पाता है। लेकिन ट्रीटमेंट से अन्य लक्षणों को कम, नियंत्रित या सुधारा जा सकता है। 

डिप्रेशन के लक्षणों के कारगर उपचार के लिए जरूरी है कि डॉक्टर की सलाह से आप दवाओं और थेरेपी के सही कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल करें। अगर किसी ट्रीटमेंट से आपको लाभ नहीं मिलता है तो आप डॉक्टर की सलाह पर दूसरे ट्रीटमेंट को अपनाकर बेहतर नतीजे पा सकते हैं।



इन बातों पर भी ध्यान दीजिये:-

1. डिप्रेशन शब्द का प्रयोग कम से कम कीजिये। 
2. छोटी-मोटी परेशानियों को भूलकर भी डिप्रेशन का नाम मत दीजिये।  3. ऐसा करने से आपका अवचेतन मस्तिष्क इस बात को घर कर सकता है और आपके सच में डिप्रेशन के मरीज बनने के संयोग बढ़ जायेंगे। 
4. अच्छी चीजें पढ़ें जो आपके अन्दर Positivity लाएं। 
5. नकारात्मक सोच रखने वालों से दूरी बना कर रखें।






तो दोस्तों आज मुझे लगता है की मैंने काफी कुछ लिख दिया है और आप समझ भी गए होंगे की डिप्रेशन क्या है और इस से कैसे बच सकते है, इत्यादि। 

तो इसी के साथ मैं Ainesh Kumar आप सब से विदा लेता हूँ और आशा करता हूँ की आप सब को ये ब्लॉग के नॉलेज अच्छा लगा होगा। 


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